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अंग्रेजो के अताताई से त्रस्त ग्रामीणो को माँ सती ने दिलाई थी मुक्ति, माँ सती का वर्षो पुराना रहा है इतिहास

अंग्रेजो के अताताई से त्रस्त ग्रामीणो को माँ सती ने दिलाई थी मुक्ति, माँ सती का वर्षो पुराना रहा है इतिहास

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आरा। भोजपुर जिले के आरा शहर से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पिअनियां गांव अपनी अनूठी धार्मिकता और सकारात्मक ऊर्जा के लिए जाना जाता है। यहां मां सती के एक विशेष रूप की पूजा 100 वर्षों से अधिक समय से की जा रही है, जो न केवल गांव वालों के लिए एक आस्था का केन्द्र है, बल्कि एक अद्भुत धार्मिक, सांस्कृतिक धरोहर भी है। ग्रामीणों का दृढ़ विश्वास है कि मां सती सीमा पर तैनात सैनिकों की रक्षा करती हैं, जिससे उन्हें हर कठिनाई का सामना करने का साहस मिलता है। हर विकट परिस्थिति मे भी मां गांव वालो के लिए सहारा बनती है।
गांव के वरिष्ठ नागरिक विश्वनाथ सिंह, जो स्वयं एक रिटायर्ड सैनिक हैं, इस मंदिर और मां सती के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए वह बताते हैं कि 1914 में गांव के एक समान्नित किसान कपिल सिंह की शादी के तुरंत बाद अचानक मृत्यु हो जाने पर उनकी पत्नी और पूरा गांव एक गहरे शोक में डूब गया। जब परिवार ने उनके पत्नी को समझाने का प्रयास किया कि जीवन को आगे बढ़ाना जरूरी है, फ़िर भी वह सम्पूर्ण सिंगार के साथ सती होने की तीव्र इच्छा से चिता पर बैठ गईं। गांव के लोग देखते रह गए और मां अपने पति के साथ इस सृष्टि से विलीन हो गई। इस स्तब्धकारी घटना के बाद, गांव में दहशत का माहौल था, बड़े स्तर पर अंग्रेजी सरकार द्वारा ग्रामीण लोगों की गिरफ्तारी हुई। तत्पश्चात गांव की महिलाओं ने मां सती की पूजा अर्चना शुरू कर दी, जिसके परिणामस्वरूप जेलर को रात में स्वप्न में मां सती का दर्शन हुआ। यही वह पल था जब गांव वालों ने मां की कृपा के प्रति अपनी आस्था को और भी मजबूती से पकड़ लिया।समय के साथ पिअनियां गांव के अनेक युवा आस्था के इस केंद्र से प्रभावित होकर भारतीय सेना के साथ-साथ राज्य और देश के विभिन्न सेवाओं में भर्ती होकर देश में सेवा प्रदान कर रहे हैं और कई सामाजिक आंदोलनों का हिस्सा बने हैं। शिवा सिंह सनी गांव के एक युवा बताते हैं कि मां सती पर गांव वालों का विश्वास अटूट है। खासकर युवाओं के लिए, यह विश्वास एक प्रेरणा स्रोत का काम करता है। उनके अनुसार, सिपाही से लेकर लेखा अधिकारी, राज्य सेवा आयोग में और भी बहुत सारे विभाग में सेवारत सभी युवा यहां मां की कृपा से अपनी मेहनत और लगन से सफलता प्राप्त कर रहे हैं।
मंदिर में पूजा-पाठ में भाग लेना भी गांव के युवाओं के लिए एक सम्मान की बात है। वर्षों से मंदिर की सेवा में लगे छोटे बाबा का कहना है कि मां सती की कृपा से गांव में कभी भी अकाल नहीं पड़ा और किसी भी व्यक्ति को भूखा नहीं रहना पड़ा। यहां के लोग मां के आशीर्वाद से अच्छे ढंग से अपना जीवन यापन करते हैं। भक्त गण दूर-दूर से इस मंदिर में मां का आशीर्वाद लेने आते है।
मंदिर प्रांगण में भक्तों में बिट्टू सिंह, रवि तिवारी, राज सिंह, विशाल सिंह, अंकेश सिंह, विवेक सिंह, सनी कुमार, सुमित कुमार, छोटू, नीरज, निहाल, सीटू, भोलू सहित कई अन्य भक्त उपस्थित होकर नवरात्रि पर माँ की विशेष पूजा आराधना करते कराते रहे हैं। इन सभी का एक ही उद्देश्य है मां सती के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करना और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति करना। यह मंदिर सच्चे श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है, जहां हर भक्त मां की अनुकंपा का अनुभव करता है और अपनी जीवन की कठिनाइयों को दूर करने का साहस पाता है। यहां की सकारात्मकता और भक्ति की भावना हर आने वाले भक्त के मन में गहराई से उतर जाती है।एक भक्त समर बहादुर सिंह (सहायक लेखा अधिकारी) के विचार से जल्दी ही मां सती के नाम से गांव में जन्म लेने वाली बच्ची को जन्म के समय एक सम्मान राशि देने का भी प्रस्ताव युवा मन में चल रहा है जो जल्दी ही मां के कृपा से धरातल पर लागू होगा।उन्होंने कहा कि मां अपना आशीर्वाद सदा बनाए रखें।इस अवसर पर समस्त ग्रामीण और भक्त गणो ने “सती मईया की जय” का जयकारा लगाकर भक्ति का दीप जलाया।

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